ओलंपिक मेडलिस्ट मीराबाई चानू ने लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचने के बाद अपनी सफलता का श्रेय परिवार के अटूट समर्थन को दिया. उन्होंने कहा कि चोटों, संघर्षों और कई त्यागों से भरे सफर के दौरान उनके परिवार ने हर कदम पर उनका साथ दिया.
रविवार को ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं का 48 किलोग्राम का खिताब जीतने के बाद मीराबाई ने कहा, "मेरे परिवार ने आज तक मेरा बहुत साथ दिया है. मुझे कई चोटें लगीं, लेकिन मेरे परिवार ने मेरा बहुत समर्थन किया."
टोक्यो ओलंपिक की सिल्वर मेडलिस्ट ने उच्च स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन बनाए रखने में अपने लंबे समय के कोच विजय शर्मा की भूमिका को भी माना. उन्होंने कहा, "शुरुआत से ही, ऐसी कई चीजें हैं जिनके लिए हमें कड़ी मेहनत करने और फोकस बनाए रखने की जरूरत होती है - चाहे वह गेम्स हों या कोई चैंपियनशिप कि हमें कैसा प्रदर्शन करना है और उस प्रदर्शन को कैसे बनाए रखना है. विजय सर ने इन सभी चीजों में हमेशा मेरा साथ दिया है."
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उन्होंने कहा, "हम इन गेम्स में इतनी ज्यादा कोशिश नहीं करने वाले थे, लेकिन मेरा पहला प्रयास मेरी अपनी गलती की वजह से असफल रहा. इसके बाद हमने सोचा कि अब पूरी ताकत झोंकनी होगी. साथ ही हमें यह भी देखना था कि ट्रेनिंग में क्या हो रहा है और किन पहलुओं में अभी और सुधार की जरूरत है. मेरे लिए यह प्रदर्शन बहुत अहम है, क्योंकि मैंने लंबे समय तक अपने शरीर का वजन नियंत्रित रखा है. अपने वजन को 48 किलोग्राम वर्ग तक लाना मेरे लिए बेहद मुश्किल रहा है."
31 वर्षीय वेटलिफ्टर ने 82 किलोग्राम स्नैच के अपने पहले प्रयास में फेल हो गईं, लेकिन मीराबाई अपने दूसरे प्रयास में उस वजन को उठाने में सफल रहीं और फिर अपने आखिरी प्रयास में 85 किलोग्राम वजन उठाया, जिससे उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्नैच के लिए नए रिकॉर्ड बनाए.
इसके बाद उन्होंने 'क्लीन एंड जर्क' में बाकी वेटलिफ्टर के मुकाबले आठ किलोग्राम ज्यादा वजन उठाया. भले ही वह अपनी पहली कोशिश में बार नहीं उठा सकीं, लेकिन भारतीय स्टार ने अपनी दूसरी कोशिश में 105 किलोग्राम वजन उठाकर इसकी भरपाई की और आसानी से गोल्ड मेडल जीत लिया. इस तरह मीराबाई ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बन गईं. इससे पहले उन्होंने गोल्ड कोस्ट 2018 और बर्मिंघम 2022 गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीतकर अपने नाम किया था.
पोडियम पर जब भारत का राष्ट्रगान बजा, तो चानू अपने आंसू रोक नहीं सकीं. उन्होंने कहा, "जब हमारा राष्ट्रगान गाया जाता है, जब हम उसे सुनते हैं, तो अपने आप आंसू निकल आते हैं. ये खुशी के आंसू होते हैं, क्योंकि मैंने भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता था."
नाइजीरिया की सिल्वर मेडलिस्ट रूथ असुकुओ न्योंग कुल 168 किग्रा वजन (75 स्नैच और 93 क्लीन एंड जर्क) उठाकर दूसरे स्थान पर रहीं. पदक जीतने के बाद न्योंग ने कहा, "यह पदक मेरे लिए काफी मायने रखता है, जिसे जीतना आसान नहीं था. मेरे दिमाग में सिर्फ पदक जीतना था. मुझे अपनी ट्रेनिंग पर विश्वास था. मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहती थी. मैं मीराबाई चानू को गोल्ड जीतने पर बधाई देना चाहती हूं."
मलेशिया की आइरीन हेनरी ने कुल 167 किग्रा (77 स्नैच और 90 क्लीन एंड जर्क) ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया. आइरीन ने कहा, "यह पदक मेरे लिए काफी अहमियत रखता है. मुझे उम्मीद है कि इससे मलेशिया के लोगों को खुशी और गर्व का एहसास होगा. मैंने पहले भी मीराबाई चानू के खिलाफ खेला है. हम अच्छे दोस्त हैं. हम एक-दूसरे को इंस्टाग्राम पर फॉलो भी करते हैं."
चानू की खिताबी जीत पर खुशी जताते हुए एक फैन ने कहा, "यह बहुत ही शानदार था. शेष खिलाड़ी 80-85 किग्रा वजन उठा रही थीं, लेकिन मीराबाई चानू ने 105 किग्रा भार उठा दिया. यह अविश्वसनीय था. इस खेल में उनका दबदबा नजर आया. भारत का नाम रोशन करने के लिए उन पर गर्व है."
एक अन्य फैन ने कहा, "मैं बहुत खुश हूं. मैंने इस तरह का इवेंट पहली बार देखा है. मीराबाई चानू ने अच्छा प्रदर्शन किया. भारत का राष्ट्रगान बजा, तो काफी गर्व महसूस हुआ. ये एक यादगार लम्हा है."
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