कोलंबो टेस्ट मैच ड्रॉ होने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी मोहम्मद कैफ ने टीम इंडिया की रणनीति और कप्तानी पर कई सवाल खड़े किए हैं. कैफ का मानना है कि पांचवें दिन पिच से अच्छा टर्न मिलने के बावजूद भारतीय टीम श्रीलंका पर दबाव नहीं बना सकी. उन्होंने कप्तान शुभमन गिल के बॉलिंग चेंजेस और फील्ड प्लेसमेंट की भी आलोचना की. हालांकि कैफ ने सीरीज से मिले कुछ पॉजिटिव संकेतों का भी जिक्र किया और खास तौर पर ध्रुव जुरेल की तारीफ की.
‘गिल अभी फिनिश्ड प्रोडक्ट नहीं हैं’
मोहम्मद कैफ ने अपने यूट्यूब चैनल पर कोलंबो टेस्ट का विश्लेषण करते हुए कहा कि बतौर कप्तान शुभमन गिल को अभी काफी कुछ सीखना होगा. कैफ के मुताबिक गिल अभी कप्तानी के लिहाज से ‘फिनिश्ड प्रोडक्ट’ नहीं हैं और अनुभव के साथ उनकी कप्तानी में सुधार आएगा. कैफ ने कहा कि कोलंबो टेस्ट में कई मौकों पर भारतीय टीम की रणनीति उन्हें समझ नहीं आई. खास तौर पर गेंदबाजों के स्पेल को लेकर उन्होंने सवाल उठाए. कैफ के मुताबिक किसी गेंदबाज से सिर्फ एक ओवर का स्पेल करवाकर उसे बदल देना समझ से परे था. इससे गेंदबाजों को लय हासिल करने और बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाने का मौका नहीं मिला.
फील्ड प्लेसमेंट पर भी उठाए सवाल
पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने टीम इंडिया की फील्ड प्लेसमेंट को भी काफी डिफेंसिव बताया. उनका मानना है कि टेस्ट मैच के पांचवें दिन पिच में अच्छा-खासा टर्न मौजूद था और भारत के पास श्रीलंका के बल्लेबाजों पर दबाव बनाने का मौका था, लेकिन टीम इंडिया उन अहम मौकों का फायदा नहीं उठा सकी. कैफ ने कहा कि भारतीय टीम को आखिरी दिन ज्यादा आक्रामक फील्ड के साथ उतरना चाहिए था. श्रीलंका की दूसरी पारी में भारतीय गेंदबाज सिर्फ तीन विकेट ही हासिल कर सके और मैच ड्रॉ हो गया. उनके मुताबिक इस नतीजे से भारतीय फैंस का निराश होना स्वाभाविक है.
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सोनल दिनुशा के खिलाफ प्लान नहीं होने पर हैरान कैफ
मोहम्मद कैफ ने सोनल दिनुशा के खिलाफ भारतीय टीम की रणनीति पर भी सवाल खड़े किए. सोनल दिनुशा इससे पहले गॉल टेस्ट में भी शतक लगा चुके थे, इसके बावजूद कैफ को लगा कि कोलंबो में भारतीय टीम उनके खिलाफ पर्याप्त तैयारी के साथ नहीं उतरी.
सोनल ने कोलंबो टेस्ट की दोनों पारियों में शतक जड़ा. कैफ ने सवाल किया कि शानदार फॉर्म में चल रहे बल्लेबाज के खिलाफ भारतीय गेंदबाजों ने फुल लेंथ गेंदबाजी का ज्यादा इस्तेमाल क्यों नहीं किया? उनके मुताबिक दिनेशा को लगातार शॉर्ट गेंदें डाली गईं, जिन्हें खेलने में उन्हें खास परेशानी नहीं हुई. कैफ का मानना है कि जब कोई बल्लेबाज पिछले मुकाबले में भी बड़ी पारी खेल चुका हो तो उसके खिलाफ स्पष्ट योजना और रिसर्च के साथ मैदान पर उतरना जरूरी होता है. इस मामले में भारतीय टीम टैक्टिकली पीछे नजर आई.
फॉलोऑन का फैसला सही, लेकिन आखिरी दिन रणनीति रही कमजोर
हालांकि कैफ ने शुभमन गिल के हर फैसले की आलोचना नहीं की. उनका मानना है कि श्रीलंका को फॉलोऑन देने का फैसला बिल्कुल सही था. भारत के पास मैच जीतने की कोशिश करने का मौका था और फॉलोऑन देकर कप्तान ने आक्रामक सोच दिखाई.
इसके बावजूद पांचवें दिन भारतीय टीम का सिर्फ तीन विकेट हासिल कर पाना कैफ को काफी निराशाजनक लगा. उनके मुताबिक आखिरी दिन टीम इंडिया की बॉडी लैंग्वेज में भी वह आक्रामकता नजर नहीं आई, जिसकी टेस्ट मैच जीतने के लिए जरूरत थी.
‘विराट कोहली की कमी महसूस हुई’
कैफ ने इस दौरान विराट कोहली का भी जिक्र किया. पूर्व भारतीय खिलाड़ी के मुताबिक पांचवें दिन मैदान पर उन्हें विराट कोहली जैसे खिलाड़ी की कमी महसूस हुई. कैफ का मानना है कि कोहली जैसा खिलाड़ी मैदान पर अपनी ऊर्जा और आक्रामक बॉडी लैंग्वेज से मैच में जान फूंक सकता है. उनका कहना था कि मुश्किल परिस्थितियों में जब विकेट नहीं मिल रहे होते हैं, तब मैदान पर खिलाड़ियों की ऊर्जा भी काफी मायने रखती है. कोलंबो टेस्ट के आखिरी दिन भारतीय टीम की बॉडी लैंग्वेज उस स्तर की नहीं दिखाई दी.
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ध्रुव जुरेल बने सीरीज का बड़ा पॉजिटिव
तमाम कमियों के बावजूद मोहम्मद कैफ ने भारत-श्रीलंका सीरीज से निकले पॉजिटिव पहलुओं की भी चर्चा की. उन्होंने खास तौर पर ध्रुव जुरेल के शतक की तारीफ की और इसे भारतीय क्रिकेट के लिए अच्छा संकेत बताया. कैफ के मुताबिक जुरेल एक कॉम्पैक्ट बल्लेबाज हैं और उनके पास कई अच्छे शॉट्स मौजूद हैं. गॉल टेस्ट में जुरेल अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर पाए थे, लेकिन कोलंबो में उन्होंने उस कमी को दूर करते हुए शतक जड़ा.
कैफ ने इस बात पर भी जोर दिया कि जुरेल पर रन बनाने का दबाव था, क्योंकि पिछले कुछ टेस्ट मुकाबलों में उनके बल्ले से बड़ी पारी नहीं आई थी. इसके बावजूद उन्होंने दबाव में खुद को संभाला और दिखाया कि वह परिस्थितियों के मुताबिक अपनी बल्लेबाजी में बदलाव कर सकते हैं.
कोलंबो टेस्ट भले ही ड्रॉ पर समाप्त हुआ हो, लेकिन कैफ के मुताबिक टीम इंडिया को इस मुकाबले से कप्तानी, गेंदबाजी रणनीति और फील्ड प्लेसमेंट को लेकर कई सबक लेने होंगे. वहीं ध्रुव जुरेल का प्रदर्शन भविष्य के लिहाज से टीम इंडिया के लिए एक बड़ा सकारात्मक पहलू रहा.
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