जिला जनसंपर्क कार्यालय, दुर्ग (छ.ग.)
सेवा की कहानी
सक्षम योजना से हिमांशी वर्मा को मिली नई पहचान, पार्लर एवं बुटीक व्यवसाय से बनीं आत्मनिर्भर
दुर्ग, 30 सितंबर 2026/ आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली ग्राम नवागांव (पुरदा), दुर्ग निवासी हिमांशी वर्मा ने अपनी मेहनत, लगन और शासन की सक्षम योजना से आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है। कभी आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण अपना व्यवसाय शुरू करने में कठिनाइयों का सामना करने वाली हिमांशी आज पार्लर एवं बुटीक का संचालन कर अपने सपनों को साकार करने में जुटी हैं।
हिमांशी के मन में हमेशा से स्वयं का व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बनने की इच्छा थी, लेकिन सीमित आर्थिक संसाधन उनके रास्ते में बाधा बन रहे थे। इसी दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ममता शर्मा के माध्यम से उन्हें सक्षम योजना की जानकारी मिली। उन्होंने योजना के अंतर्गत आवेदन किया, जिसके बाद उन्हें 80 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। योजना से मिली इस सहायता का उपयोग हिमांशी ने अपने पार्लर एवं बुटीक व्यवसाय को आगे बढ़ाने में किया। लगभग एक वर्ष पहले शुरू किया गया उनका यह व्यवसाय अब धीरे-धीरे अपनी पहचान बना रहा है। वर्तमान में उनके पास प्रतिदिन लगभग 5 से 7 ग्राहक आते हैं। इससे उन्हें प्रतिदिन करीब 250 से 300 रुपये तक की आय हो रही है।
हिमांशी अपने व्यवसाय का संचालन स्वयं कर रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में भी योगदान दे रही हैं। उनके लिए सक्षम योजना से मिली सहायता केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी बनी है। हिमांशी वर्मा कहती हैं कि सक्षम योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया है। आज उनका अपना व्यवसाय है और वे अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं। सक्षम योजना स्वरोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के साथ ही आत्मविश्वास और नई उम्मीद का माध्यम बनी है।
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सेवा की कहानी
सक्षम योजना से हिमांशी वर्मा को मिली नई पहचान, पार्लर एवं बुटीक व्यवसाय से बनीं आत्मनिर्भर
दुर्ग, 30 सितंबर 2026/ आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली ग्राम नवागांव (पुरदा), दुर्ग निवासी हिमांशी वर्मा ने अपनी मेहनत, लगन और शासन की सक्षम योजना से आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है। कभी आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण अपना व्यवसाय शुरू करने में कठिनाइयों का सामना करने वाली हिमांशी आज पार्लर एवं बुटीक का संचालन कर अपने सपनों को साकार करने में जुटी हैं।
हिमांशी के मन में हमेशा से स्वयं का व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बनने की इच्छा थी, लेकिन सीमित आर्थिक संसाधन उनके रास्ते में बाधा बन रहे थे। इसी दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ममता शर्मा के माध्यम से उन्हें सक्षम योजना की जानकारी मिली। उन्होंने योजना के अंतर्गत आवेदन किया, जिसके बाद उन्हें 80 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। योजना से मिली इस सहायता का उपयोग हिमांशी ने अपने पार्लर एवं बुटीक व्यवसाय को आगे बढ़ाने में किया। लगभग एक वर्ष पहले शुरू किया गया उनका यह व्यवसाय अब धीरे-धीरे अपनी पहचान बना रहा है। वर्तमान में उनके पास प्रतिदिन लगभग 5 से 7 ग्राहक आते हैं। इससे उन्हें प्रतिदिन करीब 250 से 300 रुपये तक की आय हो रही है।
हिमांशी अपने व्यवसाय का संचालन स्वयं कर रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में भी योगदान दे रही हैं। उनके लिए सक्षम योजना से मिली सहायता केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी बनी है। हिमांशी वर्मा कहती हैं कि सक्षम योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया है। आज उनका अपना व्यवसाय है और वे अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं। सक्षम योजना स्वरोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के साथ ही आत्मविश्वास और नई उम्मीद का माध्यम बनी है।
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शासकीय सहायता से बदली सूरजभान और सुशीला की जिंदगी, सरकार की सेवा संकल्प नीति ने दिखाई स्वावलंबन की नई राह
दुर्ग, 30 सितंबर 2026/ सरकार सेवा संकल्प की नीति के तहत् समाज के हर वर्ग तक जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित कर उनके जीवन में खुशहाली लाने का निरंतर प्रयास कर रही है। इस संकल्प से पोटिया कुंदरापारा दुर्ग के रहने वाले 80 प्रतिशत अस्थि बाधित दिव्यांग सूरजभान महिलांगे और उनकी पत्नी सुशीला डहरे के जीवन में एक नई किरण बनकर उभरी है। 11 फरवरी 2021 को सामाजिक रीति-रिवाज से विवाह के बंधन में बंधने के बाद, जब इस दिव्यांग दंपत्ति ने समाज कल्याण विभाग दुर्ग से संपर्क किया, तो अधिकारियों ने उन्हें शासन की दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना के बारे में विस्तार से मार्गदर्शन दिया। विवाह के 6 माह के भीतर आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर आवेदन प्रस्तुत करने पर दंपत्ति को शासन की ओर से 1 लाख (एक लाख रुपये) की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। शासन की सेवा भाव के संवेदनात्मक नीति से मिली इस आर्थिक मदद का सूरजभान और सुशीला ने सदुपयोग करते हुए इसे आत्मनिर्भरता का जरिया बनाया। प्राप्त राशि से सूरजभान ने एक पान पैलेस की शुरुआत की, वहीं उनकी पत्नी सुशीला ने सिलाई-कढ़ाई का कार्य शुरू कर दुकान का संचालन प्रारंभ किया। आज दोनों अपनी मेहनत और शासकीय योजना के सहयोग से परिवार की आय में वृद्धि कर एक सुखमय जीवनयापन कर रहे हैं। सूरजभान और उनकी पत्नी ने दिव्यांगों के पुनर्वास और स्वावलंबन के लिए दी जा रही इस मदद और शासन के संवेदनशील प्रयासों के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।
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दुर्ग, 30 सितंबर 2026/ सरकार सेवा संकल्प की नीति के तहत् समाज के हर वर्ग तक जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित कर उनके जीवन में खुशहाली लाने का निरंतर प्रयास कर रही है। इस संकल्प से पोटिया कुंदरापारा दुर्ग के रहने वाले 80 प्रतिशत अस्थि बाधित दिव्यांग सूरजभान महिलांगे और उनकी पत्नी सुशीला डहरे के जीवन में एक नई किरण बनकर उभरी है। 11 फरवरी 2021 को सामाजिक रीति-रिवाज से विवाह के बंधन में बंधने के बाद, जब इस दिव्यांग दंपत्ति ने समाज कल्याण विभाग दुर्ग से संपर्क किया, तो अधिकारियों ने उन्हें शासन की दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना के बारे में विस्तार से मार्गदर्शन दिया। विवाह के 6 माह के भीतर आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर आवेदन प्रस्तुत करने पर दंपत्ति को शासन की ओर से 1 लाख (एक लाख रुपये) की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। शासन की सेवा भाव के संवेदनात्मक नीति से मिली इस आर्थिक मदद का सूरजभान और सुशीला ने सदुपयोग करते हुए इसे आत्मनिर्भरता का जरिया बनाया। प्राप्त राशि से सूरजभान ने एक पान पैलेस की शुरुआत की, वहीं उनकी पत्नी सुशीला ने सिलाई-कढ़ाई का कार्य शुरू कर दुकान का संचालन प्रारंभ किया। आज दोनों अपनी मेहनत और शासकीय योजना के सहयोग से परिवार की आय में वृद्धि कर एक सुखमय जीवनयापन कर रहे हैं। सूरजभान और उनकी पत्नी ने दिव्यांगों के पुनर्वास और स्वावलंबन के लिए दी जा रही इस मदद और शासन के संवेदनशील प्रयासों के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।
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