बदनामी के दाग से मुक्त हुए - अपर्णा नाईक और फीरोज

बदनामी के दाग से मुक्त हुए - अपर्णा नाईक और फीरोज

 



नागपुर में 31 जुलाई 2024 को शहर के पागलखाना चौक स्थित आकार बिल्डिंग के एक फ्लैट में पुलिस ने छापा मारा था । पुलिस थाना सदर, जिला नागपुर के अपराध क्रमांक 496/2024 में भारतीय न्याय संहिता की धारा 143 (3) सहपठित धारा 3 (5) तथा पीटा अधिनियम की धारा 4, 5 एवं 7 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में चिटनीस नगर लेआउट, पागलखाना चौक आकार बिल्डिंग निवासी अपर्णा सचिन नाईक उम्र लगभग 37 वर्ष और गड्डीगोदाम, सुंदरबाग मस्जिद के रहने वाले फिरोज अब्दुला खान (52 वर्ष) को आरोपी बनाया गया था। मामले में आरोपियों को बाईज्जत बरी कर दिया गया है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता के अन्तर्गत अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मुकदमा चलाया गया। इस मामले में आरोपियों की ओर से अधिवक्ता राकेश कोचर एवं एडव्होकेट सुश्री अनुष्का कोचर ने पैरवी की जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी श्री एल.बी.घाडगे प्रस्तुत हुए। इस मामले में आरोपियों को बाईज्जत बरी कर दिया गया है।

इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय को बताया गया था कि पुलिस हेड कॉन्स्टेबल लक्ष्मण चौरे को गुप्त सूचना मिली कि पागलखाना चौक स्थित आकार बिल्डिंग में आरोपी अपर्णा महिलाओं को बहला-फुसलाकर देह व्यापार चला रही है। इसके बाद सूचना वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्रीमती कविता इसरकर को दी गई। पुलिस ने छद्म ग्राहक और पंच बुलाए। छापे की योजना बनाई गई और विधि अनुरूप पंचनामा तैयार किया गया। फर्जी ग्राहक को 1200 रुपये देकर मौके पर भेजा गया। कुछ समय बाद पुलिस दल ने छापा मारा। छापे के दौरान आरोपी फिरोज एक विधि संघर्ष बालक तथा दो पीड़ित महिलाओं के साथ पाया गया। उस कथित ग्राहक ने बताया कि आरोपी फिरोज ने पीड़िता को देह व्यापार हेतु उपलब्ध कराया तथा पैसे बालक को दिए गए। आरोपी अपर्णा को बाद में उसे उसकी बहन के घर से लाया गया।


अदालत ने यह पाया कि गवाहों के बयान आपस में विरोधाभासी थे। किसी ने कहा छापा दूसरी मंजिल पर पड़ा, तो किसी ने तीसरी मंजिल बताई। किसी ने कहा दरवाजा लड़की ने खोला, तो किसी ने कहा फिरोज ने खोला। व्हाट्सएप संदेश या फोन कॉल का कोई ठोस रिकॉर्ड जब्त नहीं किया गया । कथित आरोपी अपर्णा मौके पर मौजूद नहीं थी। केवल 1200 रुपये की बरामदगी पर्याप्त साक्ष्य नहीं मानी गई । न्यायालय ने कहा कि अभियोजन आवश्यक तत्व साबित करने में असफल रहा।

इस संबंध में आरोपियों की ओर से पैरवी कर रहे वकील राकेश कोचर ने बताया कि जिला न्यायाधीश-15 एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, नागपुर श्री पी. वी. बुलबुले ने इस मामले में अंतिम आदेश में कहा कि दोनों आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 143 (3) सहपठित धारा 3(5) तथा पीटा एक्ट की धारा 4, 5 एवं 7 के आरोपों से बरी किया जाता है। आरोपियों के जमानत बांड निरस्त किए जाते हैं। जब्त मोबाइल, यदि सुपुर्दगी पर वापस नहीं किया गया हो, तो अपील अवधि समाप्त होने के बाद सत्यापन उपरांत मालिक को लौटाया जाए। जब्त 1200 रुपये की राशि राज्य सरकार के पक्ष में जब्त की जाती है। इस मामले से संबंधित अन्य बेकार मुद्रेमाल अपील अवधि के बाद नष्ट किए जाने के आदेश भी दिये गये जाएं। आरोपी बीएनएसएस की धारा 481 के अनुसार 15,000 रुपये का नया व्यक्तिगत एवं जमानती बांड प्रस्तुत करेंगे।


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