भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने गुवाहाटी पिच की आलोचना की है, जहां बीती रात भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ ऐतिहासिक जीत दर्ज की. मेहमान टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 405 रन बनाए थे. इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भी कभी ऐसा नहीं लगा कि भारत इस मैच को हार भी सकती है. पाटा पिच को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं, जहां एक वनडे में 800 से ज्यादा रन बने. 4 बल्लेबाजों ने शतक और 1 (शुभमन गिल) ने दोहरा शतक जड़ा.
गौतम गंभीर ने बरसापारा स्टेडियम की पिच पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियां सही नहीं है, जिसमें गेंदबाजों के लिए बिल्कुल मदद न हो. उनका मानना है कि बल्ले और गेंद के बीच अच्छा मुकाबला होना चाहिए. मैच के बाद स्टार स्पोर्ट्स से बात करते हुए हेड कोच ने कहा, "सच कहूं तो मेरा मानना है कि बल्ले और गेंद के बीच मुकाबला होना चाहिए, लेकिन ये क्रिकेट नहीं, बल्कि सिर्फ बल्लेबाजी है."
गंभीर ने कहा, "आप सोचिए कि एक नया गेंदबाज इस विकेट पर गेंदबाजी कर रहा है. सामने वाली टीम 400 बनाती है और हम चेज कर लेते हैं. ये शानदार रिकॉर्ड है. दर्शकों के लिए, ब्रॉडकास्टर के लिए ये अच्छा है, लेकिन मुझसे एक सच्चे क्रिकेट प्रशंसक और कोच के तौर पर पूछें तो मैं गेंदबाजों के प्रति भी सहानुभूति रखूंगा. इस तरह की विकेट पर गेंदबाजों के लिए सही नहीं होता. गेंदबाजों को कुछ मदद मिल सके, हमें कुछ ऐसा करना होगा."
वनडे इतिहास में सिर्फ दूसरी बार हुआ जब किसी टीम ने 400 से अधिक के लक्ष्य को हासिल कर लिया हो, इससे पहले दक्षिण अफ्रीका ने 2006 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 438 रन का पीछा करते हुए जीत दर्ज की थी. गंभीर का मानना है कि गेंदबाजों का आंकलन करते हुए सिर्फ उनके गेंदबाजी आंकड़े नहीं देखने चाहिए, बल्कि उसने अपनी प्लानिंग के तहत गेंदबाजी की या नहीं ये भी देखना चाहिए.
गंभीर ने कहा, "आप हमेशा गेंदबाजों के प्रति सख्त नहीं हो सकते, क्योंकि कई बार आंकड़े खराब होते हैं लेकिन वो उनकी खराब गेंदबाजी को नहीं दर्शाते. वह सिर्फ अच्छी जगह पर गेंद डाल सकता है. 2 नई गेंद, 5 फील्डर 30 यार्ड से अंदर और आजकल जिस तरह की पावर-हिटिंग होती है, गेंदबाजों के पास ज्यादा विकल्प नहीं होते हैं."
गंभीर ने कहा कि कोच या सपोर्ट स्टाफ सबसे पहले ये देखते हैं कि क्या गेंदबाज ने अपनी योजनाओं के अनुसार गेंदबाजी की? अगर उसने ऐसा किया है तो फिर उसके प्रति सख्त नहीं होना चाहिए. उन्होंने डेब्यू मैच खेल रहे आकिब नबी का उदाहरण देते हुए कहा कि 'वह अपना पहला मैच खेल रहे थे और उन्हें थोड़ा समर्थन की भी चाहिए, क्योंकि इस मैच में गेंदबाज के लिए ज्यादा कुछ नहीं था.'
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