PRO Durg news & success story & photo _ 05 October 2026 _ File 02

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जिला जनसंपर्क कार्यालय, दुर्ग (छ.ग.)
समाचार

सेवा संकल्प अभियान-

बकेट क्लेम अभियान में उल्लेखनीय प्रगति

1.41 लाख से अधिक बकेट क्लेम पूर्ण, किसानों एवं सह-हिस्सेदारों के सहमति सत्यापन का कार्य जारी


दुर्ग, 05 अक्टूबर 2026/धान खरीदी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों एवं उनके सह-हिस्सेदारों का शत-प्रतिशत एग्रीस्टेक पंजीयन सुनिश्चित करने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा तेजी से कार्य किया जा रहा है। इस वर्ष धान बिक्री के लिए एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन के साथ सह-खातेदारों का बकेट क्लेम (सहमति सत्यापन) अनिवार्य किया गया है। तहसील स्तर पर आयोजित शिविरों के माध्यम से बकेट क्लेम का निराकरण किया जा रहा है। किसान एवं सह-हिस्सेदार शिविर में समिति, सीएससी एवं पटवारी के माध्यम से बकेट आईडी बनवा सकते हैं। इसके लिए जिले में विशेष अभियान चलाकर किसानों को सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
जिले में राजस्व एवं प्रशासनिक कार्यों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए संचालित बकेट क्लेम अभियान में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। 5 अक्टूबर 2026 तक जिले में कुल 4,56,724 बकेट्स में से 1,41,094 बकेट्स का क्लेम पूर्ण किया जा चुका है। बकेट क्लेम प्रक्रिया के माध्यम से राजस्व संबंधी कार्यों के निराकरण को गति मिल रही है। तहसील स्तर पर अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा लगातार कार्य करते हुए अधिक से अधिक प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण किया जा रहा है। बोरी तहसील में 11,848, अहिवारा में 15,496 तथा पाटन में 52,735 बकेट क्लेम पूर्ण किए जा चुके हैं। वहीं दुर्ग तहसील में 33,444 बकेट क्लेम का निराकरण किया गया है।
जिले में बकेट क्लेम की प्रगति को और गति देने के लिए जिला प्रशासन द्वारा नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है। कम प्रगति वाले क्षेत्रों में विशेष अभियान एवं शिविर आयोजित कर लंबित प्रकरणों के निराकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप तेजी से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। बकेट क्लेम अभियान के परिणामस्वरूप राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं के निराकरण में तेजी आने के साथ ही किसानों एवं आम नागरिकों को प्रशासनिक सेवाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से मिल रहा है। जिला प्रशासन द्वारा धान खरीदी की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के साथ किसानों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

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कृषि विभाग ने धान में राईस पैनिकल माईट का प्रकोप के लक्षण, फैलाव एवं एकीकृत प्रबंधन हेतु जारी की एडवायजरी

दुर्ग, 05 अक्टूबर 2026/ संयुक्त संचालक कृषि संभाग-दुर्ग द्वारा धान की फसल में राईस पैनिकल माईट (धान की मकड़ी) से होने वाली क्षति के लक्षणों एवं इसके समुचित प्रबंधन हेतु एडवायजरी जारी की गई है। कृषि विज्ञान केन्द्र पाहंदा (अ), दुर्ग के विशेषज्ञों के अनुसार यह अत्यंत सूक्ष्म कीट (स्टेनेओटारसोनेमस स्पिंकी स्माइली) धान के गभोट (बूटिंग) अवस्था से लेकर बालियों में दूध भरने के दौरान फसल पर हमला करता है, जिससे दाने बदरंग (कत्थई, लाल या काले) एवं खाली (बदरा) रह जाते हैं तथा उत्पादन में 5 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक का भारी नुकसान हो सकता है। पत्तियों पर सफेद-भूरी धारियां बनना, बालियों में फफूंद व जीवाणु जनित संक्रमण से धब्बे पड़ना तथा चावल बनने की प्रक्रिया का रुकना इसके प्रमुख पहचान चिन्ह हैं। इस कीट की मादा एक बार में 50 से 80 अंडे देती है, जिससे 2 से 4 दिन में निकले निंफ (शिशु) बालियों व दानों का रस चूसकर 3 से 7 दिनों में सर्वाधिक क्षति पहुँचाते हैं और मात्र 10 से 12 दिनों में नई पीढ़ी तैयार हो जाती है।  25°C से 35°C तापमान, 80 से 90 प्रतिशत की नमी, उमस भरा मौसम तथा नाइट्रोजन (यूरिया) का अत्यधिक प्रयोग इसके तीव्र फैलाव के मुख्य कारण हैं। यह कीट फसल अवशेषों (नरई), मेड़ों के खरपतवारों, जंगली लाल धान, संक्रमित बीज, तेज हवा, सिंचाई जल, कृषि यंत्रों, मजदूरों के कपड़ों एवं अन्य मित्र कीटों के माध्यम से एक खेत से दूसरे खेत में तेजी से प्रसारित होता है।
    कीट के प्रभावी नियंत्रण के लिए कृषि विभाग ने किसानों को एकीकृत प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है। इसके अंतर्गत खेतों एवं मेड़ों की सफाई रखने, कटाई के बाद खेत की गहरी जुताई कर अवशेष नष्ट करने, धान के बाद दलहनी-तिलहनी फसलों का फसल चक्र अपनाने और प्राकृतिक रूप से कीटों को खाने वाली शिकारी (मित्र) मकड़ियों का संरक्षण करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही यूरिया का असंतुलित प्रयोग न करते हुए पोटाश व सल्फर की संतुलित मात्रा देने की सलाह दी गई है। रासायनिक नियंत्रण हेतु गभोट एवं बालियां निकलने की शुरुआती अवस्था में स्पाइरोमेसिफेन 22.9 प्रतिशत एससी (150 मिली) तथा प्रोपिकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी (150 मिली) प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने की अनुशंसा की गई है।  

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जंजगिरी में 35 महिलाओं को ग्रामीण राजमिस्त्री का दिया गया प्रशिक्षण

-प्रधानमंत्री आवास निर्माण में राजमिस्त्री के रूप में देंगी सहयोग, महिलाओं को मिलेगा रोजगार का अवसर


दुर्ग, 05 अक्टूबर 2026/ ग्राम पंचायत जंजगिरी में 35 महिलाओं को राजमिस्त्री प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ग्राम पंचायत भवन में आयोजित प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनर सुश्री सरिता रात्रे द्वारा दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में महिलाओं को राजमिस्त्री कार्य से संबंधित तकनीकी जानकारी एवं व्यावहारिक कौशल प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद महिलाएं प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के आवास निर्माण में राजमिस्त्री के रूप में सहयोग करेंगी। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित राजमिस्त्री उपलब्ध होंगे और आवास निर्माण कार्य में गति एवं गुणवत्ता लाने में मदद मिलेगी। वहीं, महिलाओं को प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार एवं आय के नए अवसर मिलेंगे और वे अपने कौशल का उपयोग कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी।
कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के निर्देशानुसार ग्रामीण महिलाओं को रोजगारोन्मुख कौशल से जोड़ा जा रहा है, जो महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के अवसर मिलेंगे और वे गांव के विकास कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी।
जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि प्रशिक्षित महिलाओं की सेवाओं का लाभ प्रधानमंत्री आवास निर्माण में ग्रामीण परिवारों को मिलेगा। स्थानीय स्तर पर राजमिस्त्री उपलब्ध होने से आवास निर्माण में सुविधा होगी तथा महिलाओं को कौशल के साथ रोजगार का अवसर भी प्राप्त होगा। इस प्रशिक्षण से महिला कौशल विकास और प्रधानमंत्री आवास निर्माण दोनों क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। महिलाओं को जहां रोजगार और आय के नए अवसर प्राप्त होंगे, वहीं ग्रामीण परिवारों को अपने गांव में ही प्रशिक्षित राजमिस्त्री की सुविधा मिलेगी। इससे प्रधानमंत्री आवासों के निर्माण को गति देने के साथ गुणवत्तापूर्ण आवास निर्माण में भी सहयोग मिलेगा।

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मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना के तहत निर्माण कार्यों के लिए 23.40 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति

दुर्ग, 05 अक्टूबर 2026/ जिला पंचायत दुर्ग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से श्मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजनाश् वर्ष 2026-27 के अंतर्गत कुल 23.40 लाख रुपये के विभिन्न निर्माण कार्यों हेतु प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके तहत विकासखंड दुर्ग की ग्राम पंचायत अंजोरा (ढ़ा) में 10.40 लाख रुपये की लागत से 4 सी.सी. रोड निर्माण कार्यों को मंजूरी दी गई है, जिसमें रामबगस देशमुख के घर से संतोष देशमुख के घर की ओर, चन्द्रकुमार साहू के घर से ईश्वरी नाई के घर की ओर तथा भगवती साहू के घर से गैंद लाल राऊत के घर की ओर (2 कार्य) मार्ग का निर्माण शामिल है। वहीं विकासखंड धमधा की ग्राम पंचायत चीचा में 13.00 लाख रुपये की कुल स्वीकृत लागत से लोधीपारा एवं यादव पारा में दो सामुदायिक भवनों (प्रत्येक 6.50 लाख रुपये) के निर्माण की स्वीकृति दी गई है।  
 इन सभी कार्यों की कार्यकारी एजेंसी संबंधित ग्राम पंचायतों को बनाया गया है। जिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बीके दुबे ने जनपद पंचायत दुर्ग एवं धमधा के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के तकनीकी मापदंडों के अनुरूप मानक प्राक्कलन डाउनलोड कर निर्माण कार्य सुनिश्चित कराएं।

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जिला जनसंपर्क कार्यालय, दुर्ग (छ.ग.)
सेवा की कहानी

सेवा संकल्प से संवरती जिंदगी

-पक्की छत ने महिलाओं को दिया सुरक्षा, सम्मान और आत्मविश्वास


दुर्ग, 05 अक्टूबर 2026/ राज्य सरकार की ’सेवा संकल्प’ भावना और जन-कल्याणकारी नीतियों का सीधा असर अब ग्रामीण अंचल की अंतिम पंक्ति तक दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण जिले की महिलाओं के जीवन में खुशहाली और स्थायित्व का नया आधार बन रही है। कभी कच्चे मकानों में बारिश और मौसम की मार झेलने वाली मोंगरा बाई, प्रमिला बाई, जानकी बाई और किरण ढहरिया जैसी महिलाओं के लिए पक्का घर केवल चार दीवारें नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्वाभिमान और उज्ज्वल भविष्य की नई पहचान साबित हो रहा है। ग्राम पुरई की श्रीमती मोंगरा बाई (पति स्व. पीताम्बर पटेल) और ग्राम कुटेलाभाठा की श्रीमती किरण ढहरिया (पति स्व. दिलीप ढहरिया) को पति के निधन के बाद विकट आर्थिक परिस्थितियों और कच्चे मकान की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। शासन की सेवा संकल्प की नीति के तहत योजना का लाभ मिलने से न केवल उनका पक्का घर बनकर तैयार हुआ, बल्कि मोंगरा बाई को आवास निर्माण के लिए 1 लाख 20 हजार रुपये तथा मनरेगा से 23,490 रुपये की मजदूरी भी मिली। इसी तरह ग्राम पुरई की प्रमिला बाई और जानकी बाई का भी अपने पक्के घर का वर्षों पुराना सपना साकार हुआ।
आज इन सभी परिवारों को पक्की छत के साथ उज्ज्वला योजना से गैस कनेक्शन, नल-जल योजना और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल चुकी हैं। शासन के संवेदनशील सेवा संकल्प और निरंतर प्रयासों से जिले की हितग्राही महिलाओं के जीवन में खुशहाली, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत हुई है।

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