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जिला जनसंपर्क कार्यालय, राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)
समाचार
रबी 2026 में फसल विविधीकरण एवं वैकल्पिक खेती को बढ़ावा देने कृषि विभाग की तकनीकी कार्यशाला आयोजित
- द्वि-फसलीय क्षेत्र के विस्तार, अनुबंध खेती एवं किसानों की आय में वृद्धि पर दिया गया जोर
राजनांदगांव 25 सितम्बर 2026। रबी वर्ष 2026 में जिले में द्वि-फसलीय क्षेत्र को बढ़ावा देने, किसानों को वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने तथा फसल विविधीकरण के माध्यम से कृषकों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा तकनीकी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में कृषि विभाग के साथ उद्यानिकी, मत्स्य पालन एवं पशुपालन विभाग, सहकारी संस्थाओं, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, कृषि क्षेत्र से जुड़े निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों, मैदानी अधिकारियों एवं किसान मित्रों ने सहभागिता की।
कार्यशाला में रबी मौसम में किसानों द्वारा ली जाने वाली विभिन्न फसलों के संबंध में तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने, उपलब्ध सिंचाई जल का समुचित उपयोग करने, फसल चक्र में परिवर्तन लाने तथा किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ दिलाने के उद्देश्य से तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। अधिकारियों ने किसानों की भूमि, सिंचाई की उपलब्धता, स्थानीय परिस्थितियों एवं बाजार की संभावनाओं के अनुरूप फसल चयन और फसल विविधीकरण की कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री दुर्गा प्रसाद अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों को पारंपरिक फसल पद्धतियों के साथ वैकल्पिक फसलों को अपनाने, कृषि क्षेत्र में नवाचार करने तथा उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण से कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और किसानों के आर्थिक हितों को मजबूत करने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।
उप संचालक कृषि श्री टीकम सिंह ठाकुर ने गत वर्ष जिले में फसल विविधीकरण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों की जानकारी देते हुए सभी मैदानी अधिकारियों एवं किसान मित्रों से किसानों के बीच पहुंचकर व्यापक चर्चा करने तथा क्षेत्रवार कार्ययोजना तैयार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि फसल चयन करते समय जल की मांग, सिंचाई की उपलब्धता, भूमि की प्रकृति एवं बाजार की संभावनाओं को ध्यान में रखना आवश्यक है। किसानों को उपलब्ध जल संसाधनों के अनुरूप फसलों का चयन करने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि फसल चक्र में परिवर्तन के साथ उनकी आय में वृद्धि की जा सके।
अनुबंध खेती के माध्यम से मक्का उत्पादन को मिलेगा प्रोत्साहन
कार्यशाला में गॉरमेट पॉपकॉर्न कंपनी के प्रतिनिधि श्री दयाजी द्वारा पॉपकॉर्न मक्का की अनुबंध खेती को बढ़ावा देने के संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया गया। उन्होंने किसानों के साथ अनुबंध करने, निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपज की खरीदी तथा तय समय-सीमा में भुगतान की व्यवस्था की जानकारी दी। अनुबंध खेती के माध्यम से किसानों को वैकल्पिक फसल अपनाने और अपनी उपज के लिए सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
इसी क्रम में एबीस ग्रुप की ओर से श्री शिवेंद्र दुबे ने मक्का की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान पर मक्का बीज उपलब्ध कराने तथा उत्पादित मक्का की खरीदी की व्यवस्था के संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने कंपनी के माध्यम से किसानों को बीज उपलब्ध कराने एवं उपज की खरीदी से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी साझा की। इस पहल का उद्देश्य किसानों को धान के अतिरिक्त वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना तथा कृषि उत्पादन को बाजार से जोडऩा है।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों एवं महिला समूहों की सहभागिता
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र से डॉ. नूतन रामटेके ने सहभागिता की। कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन एवं तकनीकी जानकारी के माध्यम से किसानों को रबी फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों, फसल चयन तथा कृषि पद्धतियों में नवाचार के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया। मां बम्लेश्वरी स्व-सहायता समूह की ओर से श्री देवांगन उपस्थित रहे। उन्होंने महिला स्वसहायता समूहों के माध्यम से जागरूकता अभियान को बढ़ावा देने, ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों तक पहुंच बनाने तथा फसल विविधीकरण के प्रति उन्हें प्रेरित करने की बात कही। महिला समूहों की सहभागिता से कृषि संबंधी योजनाओं एवं नवाचारों की जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।
किसान मित्रों से संवाद कर तैयार की जाएगी क्षेत्रवार कार्ययोजना
कार्यशाला के दौरान किसान मित्रों के साथ संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने अपने क्षेत्रों में फसल परिवर्तन के दौरान आने वाली समस्याओं, किसानों की आवश्यकताओं एवं विभिन्न सुझावों को साझा किया। इन सुझावों के आधार पर जिले में फसल चक्र परिवर्तन, वैकल्पिक फसलों के विस्तार तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास करने पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में अनुभागीय कृषि अधिकारी श्री संतलाल देशलहरे, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री अविनाश दुबे, श्री संदीप वैष्णव, श्री जी.पी. सहारे एवं श्री रानाडे सहित कृषि विभाग के सभी मैदानी अधिकारी एवं किसान मित्र उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त उद्यानिकी, मत्स्य पालन, पशुपालन विभाग, सहकारी संस्थाओं, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक तथा कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य कृषि से जुड़े सभी विभागों, वैज्ञानिक संस्थानों, सहकारी संस्थाओं, निजी क्षेत्र एवं मैदानी अमले के समन्वय से जिले में रबी फसलों के क्षेत्रफल में वृद्धि करना, द्वि-फसलीय क्षेत्र का विस्तार करना तथा किसानों को लाभकारी एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों की ओर अग्रसर करना रहा। फसल विविधीकरण एवं वैकल्पिक खेती को बढ़ावा देकर किसानों की लागत कम करने, उत्पादन बढ़ाने और उनकी आय में वृद्धि के लिए समन्वित रूप से कार्य करने पर बल दिया गया।
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