भारत में कैंसर का बढ़ता खतरा:
पिछले 20 साल में कितना बदला आंकड़ा?
कैंसर के मामले क्यों बढ़ रहे हैं? इसके मुख्य कारण क्या हैं? सरकार की व्यवस्था में कहाँ चुनौतियाँ हैं और इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
India Fact News Special Report
कैंसर आज भारत की बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल है। कैंसर एक बीमारी नहीं बल्कि कई अलग-अलग प्रकार की बीमारियों का समूह है। इसके कारण, जोखिम और उपचार कैंसर के प्रकार के अनुसार अलग-अलग होते हैं।
International Agency for Research on Cancer (IARC) के GLOBOCAN 2022 अनुमान के अनुसार भारत में वर्ष 2022 में लगभग 14.13 लाख नए कैंसर मामले सामने आए और लगभग 9.17 लाख लोगों की कैंसर से मृत्यु हुई।
पिछले 20 साल में कैंसर कितना बढ़ा?
2000 से 2022 के बीच उपलब्ध अनुमानों में भारत में कैंसर से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई देती है। एक हालिया विश्लेषण में 2000 में लगभग 4.9 लाख कैंसर मौतों का अनुमान था, जबकि 2022 में यह संख्या लगभग 9.17 लाख बताई गई।
2022 में कौन से कैंसर सबसे ज्यादा सामने आए?
| कैंसर | 2022 में अनुमानित नए मामले | कुल मामलों में हिस्सा |
|---|---|---|
| Breast Cancer | 1,92,020 | 13.6% |
| Lip & Oral Cavity Cancer | 1,43,759 | 10.2% |
| Cervical Cancer | 1,27,526 | 9.0% |
| Lung Cancer | 81,748 | 5.8% |
| Oesophageal Cancer | 70,637 | 5.0% |
कैंसर होने के मुख्य कारण क्या हैं?
कैंसर का कोई एक कारण नहीं है। अलग-अलग कैंसर के जोखिम अलग होते हैं। लेकिन कई ज्ञात risk factors ऐसे हैं जिन्हें कम किया जा सकता है।
तंबाकू
सिगरेट, बीड़ी और smokeless tobacco जैसे उत्पाद कई प्रकार के कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं।
शराब
शराब का सेवन कई प्रकार के कैंसर के जोखिम से जुड़ा हुआ है।
अस्वस्थ जीवनशैली
असंतुलित आहार, कम शारीरिक गतिविधि और मोटापा कुछ कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
पर्यावरणीय जोखिम
वायु प्रदूषण और कुछ occupational या environmental exposures भी कैंसर के जोखिम से जुड़े हो सकते हैं।
कुछ संक्रमण
HPV, hepatitis B और hepatitis C जैसे कुछ infections विशेष प्रकार के कैंसर के जोखिम से जुड़े हैं।
आनुवंशिक और अन्य कारण
उम्र, परिवार का इतिहास, genetic factors और अन्य जैविक कारण भी भूमिका निभा सकते हैं।
सरकार कहाँ चुनौतियों का सामना कर रही है?
भारत सरकार ने कैंसर की रोकथाम, screening, diagnosis और treatment के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। इसलिए यह कहना कि सरकार ने कैंसर पर “कुछ नहीं किया” तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
Ministry of Health and Family Welfare के National Programme for Prevention and Control of Non-Communicable Diseases के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में oral, breast और cervical cancer की population-based screening का प्रावधान है।
क्या screening हर जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर पहुंच रही है?
क्या ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में diagnosis और treatment की सुविधा समान रूप से उपलब्ध है?
क्या मरीजों को diagnosis के बाद treatment तक पहुंचने में आर्थिक और भौगोलिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है?
क्या tobacco control, pollution reduction और cancer awareness जैसे prevention measures पर्याप्त स्तर तक पहुंच रहे हैं?
सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार cancer prevention और control को National Programme for Prevention and Control of Non-Communicable Diseases (NP-NCD) के तहत primary healthcare system से जोड़ा गया है।
सरकार के 2024-25 annual report के अनुसार ये facilities देश में NP-NCD के तहत स्थापित की गई हैं। इसके अलावा tertiary cancer care facilities को मजबूत करने के लिए State Cancer Institutes और Tertiary Cancer Care Centres की योजना भी लागू है।
सरकार कैंसर को कैसे रोक सकती है?
तंबाकू की बिक्री, advertising और युवाओं में consumption रोकने वाले कानूनों का प्रभावी enforcement बढ़ाया जाए।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और community level पर cancer screening को मजबूत किया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में diagnosis, pathology, radiotherapy, chemotherapy और referral networks को मजबूत किया जाए।
air pollution और occupational exposures को कम करने के लिए health-based monitoring और enforcement को मजबूत किया जाए।
स्कूल, कॉलेज, पंचायत और urban communities में evidence-based cancer awareness campaigns चलाए जाएं।
diagnosis और treatment की लागत कम करने तथा financial protection बढ़ाने पर जोर दिया जाए।
जिन infections से कुछ cancers का risk बढ़ता है, उनके vaccination और prevention programmes को मजबूत किया जाए।
राज्यों और जिलों से cancer incidence, stage, treatment और outcomes का बेहतर और नियमित data collection किया जाए।
निष्कर्ष: कैंसर के खिलाफ लड़ाई सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं
भारत में कैंसर का बढ़ता burden केवल स्वास्थ्य मंत्रालय या अस्पतालों की जिम्मेदारी नहीं है। इसकी रोकथाम में public health policy, tobacco control, pollution control, vaccination, healthy lifestyle, early screening और affordable treatment—सभी की भूमिका है।
सरकारी योजनाएं मौजूद हैं, लेकिन उनकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि वे कितनी प्रभावी तरीके से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों, गरीब परिवारों और diagnosis के बाद treatment तक पहुंचने वाले मरीजों के लिए healthcare access महत्वपूर्ण मुद्दा है।
आंकड़ों के स्रोत
1. International Agency for Research on Cancer (IARC) /
WHO – GLOBOCAN 2022
भारत में cancer incidence और mortality के 2022 estimates।
2. Indian Council of Medical Research (ICMR)
National Cancer Registry Programme और cancer surveillance।
3. Ministry of Health & Family Welfare, Government of India
National Programme for Prevention and Control of Non-Communicable
Diseases (NP-NCD)।
4. WHO India Cancer Country Profile
Tobacco, alcohol, infections, obesity और अन्य cancer risk factors
से संबंधित estimates।
© India Fact News | Health Awareness Special Report