प्रेस विज्ञप्ति

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देश की व्यवस्था संविधान से चलेगी दबाव से नहीं - रवि सिन्हा

राजनांदगांव। भाजपा पार्षद एवं शासकीय शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय के जनभागीदारी समिति अध्यक्ष रवि सिन्हा ने लोकतंत्र और भीड़तंत्र के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत संविधान, कानून के शासन और जनता के जनादेश में निहित है। भीड़ का दबाव, राजनीतिक शोर और अराजकता कभी भी संवैधानिक व्यवस्था का विकल्प नहीं हो सकते।

रवि सिन्हा ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध की आड़ में कानून और संवैधानिक मर्यादाओं को चुनौती देने की छूट किसी को नहीं है। सरकार की आलोचना करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन आलोचना तथ्यों और तर्कों पर आधारित होनी चाहिए। केवल राजनीतिक विरोध के लिए विरोध करना और हर विषय को विवाद में बदलना स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की राजनीति पर आज गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि कांग्रेस भीड़ के दबाव की राजनीति को समर्थन देती है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और देश की राजनीतिक स्थिरता  के लिए चिंताजनक है। राजनीतिक स्वार्थ के लिए संवैधानिक मर्यादाओं को कमजोर करना और जनता के जनादेश के विरुद्ध माहौल तैयार करना किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक दल को शोभा नहीं देता। कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि वह संविधान, कानून और लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ खड़ी है या अराजकता और दबाव की राजनीति के साथ।

सिन्हा ने कहा कि लोकतंत्र केवल अपनी बात मनवाने का माध्यम नहीं, बल्कि दूसरों के विचारों, संवैधानिक संस्थाओं और जनादेश का सम्मान करने की व्यवस्था है। जनता का फैसला स्वीकार करना ही लोकतांत्रिक परिपक्वता की पहचान है। जब भीड़ के दबाव को जनमत से ऊपर रखने की कोशिश होती है, तब लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, संवैधानिक व्यवस्था और कानून के शासन में विश्वास रखती है। राजनीतिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन मतभेदों का समाधान संवाद, तर्क और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से होना चाहिए, न कि दबाव या अराजकता से।

सिन्हा ने कहा कि राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे जनता के बीच तथ्यात्मक चर्चा करें, लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करें और समाज में कानून के प्रति सम्मान की भावना मजबूत करें। देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने वाली किसी भी गतिविधि का विरोध लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में किया जाना चाहिए।

रवि सिन्हा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “लोकतंत्र में आवाज उठाइए, सवाल पूछिए और सरकार की आलोचना भी कीजिए, लेकिन संविधान और कानून की मर्यादा में रहकर। लोकतंत्र में ताकत भीड़ के आकार से नहीं, विचारों की मजबूती और जनता के विश्वास से तय होती है। देश की व्यवस्था संविधान से चलेगी, किसी के दबाव से नहीं।”

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती तभी सुनिश्चित होगी, जब राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के साथ संवैधानिक मर्यादाओं और जनता के निर्णय का सम्मान भी कायम रहे। देश की जनता लोकतंत्र में विश्वास करती है, भीड़तंत्र में नहीं; भारत की व्यवस्था संविधान से चलेगी, राजनीतिक दबाव और अराजकता से नहीं।

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