जिला जनसंपर्क कार्यालय, दुर्ग (छ.ग.)
भिलाई शहरी क्षेत्र अंतर्गत नंदिनी रोड, पावर हाउस से छावनी चौक मार्ग में भारी एवं मध्यम वाहनों का आवागमन प्रातः 6 बजे से रात्रि 11 बजे तक प्रतिबंधित
दुर्ग, 06 नवम्बर 2026/ भिलाई शहरी क्षेत्र अंतर्गत नंदिनी रोड पावर हाउस से छावनी चौक मार्ग पर त्यौहारी सीजन में ट्रैफिक का दबाव अत्यधिक बढ़ने की संभावना को ध्यान में रखते हुए तथा जनहित में सुगम एवं सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण हेतु कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री अभिजीत सिंह द्वारा मोटर वाहन अधिनियम-1988 तथा छत्तीसगढ़ राज्य शासन द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उक्त मार्ग पर भारी एवं मध्यम मॉल वाहक वाहनों का आवागमन प्रातः 6 बजे से रात्रि 11 बजे तक पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी के आदेशानुसार नंदिनी रोड से पावर हाउस से छावनी चौक मार्ग पर सभी प्रकार के भारी एवं मध्यम मॉल वाहक वाहनों का आवागमन प्रातः 6 बजे से रात्रि 11 बजे तक पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। यह प्रतिबंध त्यौहारी सीजन (दिनांक 16 नवम्बर 2026 तक) को देखते हुए तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। अत्यावश्यक सेवाओं जैसे- आपातकालीन वाहन (एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड आदि)। दवाई, डीजल/पेट्रोल और रसोई गैस सिलेण्डर परिवहन करने वाले वाहन। शासकीय उचित मूल्य दुकानों की खाद्यन्न सामग्री वितरण वाहन। कस्टम मीलिंग (धान/चांवल), दूध, सब्जी, फल और अन्य दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्रियां ले जाने वाले वाहन को इस प्रतिबंध से छूट रहेगी। आदेश का उल्लंघन करने वाले वाहनों/चालकों के विरूद्ध मोटर वाहन अधिनियम तथा प्रचलित वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश 06 नवम्बर 2026 से प्रभावशील हो गया है। जो दिनांक 16 नवम्बर 2026 के उपरांत पूर्ववत् व्यवस्था लागू होगी। आदेश का उल्लंघन करने पर वैधानिक दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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भिलाई शहरी क्षेत्र अंतर्गत नंदिनी रोड, पावर हाउस से छावनी चौक मार्ग में भारी एवं मध्यम वाहनों का आवागमन प्रातः 6 बजे से रात्रि 11 बजे तक प्रतिबंधित
दुर्ग, 06 नवम्बर 2026/ भिलाई शहरी क्षेत्र अंतर्गत नंदिनी रोड पावर हाउस से छावनी चौक मार्ग पर त्यौहारी सीजन में ट्रैफिक का दबाव अत्यधिक बढ़ने की संभावना को ध्यान में रखते हुए तथा जनहित में सुगम एवं सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण हेतु कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री अभिजीत सिंह द्वारा मोटर वाहन अधिनियम-1988 तथा छत्तीसगढ़ राज्य शासन द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उक्त मार्ग पर भारी एवं मध्यम मॉल वाहक वाहनों का आवागमन प्रातः 6 बजे से रात्रि 11 बजे तक पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी के आदेशानुसार नंदिनी रोड से पावर हाउस से छावनी चौक मार्ग पर सभी प्रकार के भारी एवं मध्यम मॉल वाहक वाहनों का आवागमन प्रातः 6 बजे से रात्रि 11 बजे तक पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। यह प्रतिबंध त्यौहारी सीजन (दिनांक 16 नवम्बर 2026 तक) को देखते हुए तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। अत्यावश्यक सेवाओं जैसे- आपातकालीन वाहन (एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड आदि)। दवाई, डीजल/पेट्रोल और रसोई गैस सिलेण्डर परिवहन करने वाले वाहन। शासकीय उचित मूल्य दुकानों की खाद्यन्न सामग्री वितरण वाहन। कस्टम मीलिंग (धान/चांवल), दूध, सब्जी, फल और अन्य दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्रियां ले जाने वाले वाहन को इस प्रतिबंध से छूट रहेगी। आदेश का उल्लंघन करने वाले वाहनों/चालकों के विरूद्ध मोटर वाहन अधिनियम तथा प्रचलित वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश 06 नवम्बर 2026 से प्रभावशील हो गया है। जो दिनांक 16 नवम्बर 2026 के उपरांत पूर्ववत् व्यवस्था लागू होगी। आदेश का उल्लंघन करने पर वैधानिक दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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दुर्ग भिलाई शहरी क्षेत्र अंतर्गत 09 प्रमुख मार्गों में भारी एवं मध्यम वाहनों का दोपहर 12 बजे से अपरान्ह 2 बजे तक आवागमन में छूट निरस्त
दुर्ग, 06 नवम्बर 2026/ कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री अभिजीत सिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के प्रस्ताव से सहमत होते हुए जनहित में सुगम व सुरक्षित यातायात व्यवस्था संचालित करने तथा सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण हेतु मोटर वाहन अधिनियम-1988 तथा छत्तीसगढ़ राज्य शसन द्वार प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पूर्व में जारी आदेश में संशोधन किया है। संशोधित आदेश के अनुसार दुर्ग भिलाई शहरी क्षेत्र अंतर्गत 09 प्रमुख सड़क मार्ग क्रमशः पुलगांव चौक से पोटिया रोड। पुलगांव चौक से गंजपारा की ओर। गुरूद्वारा चौक से बटालियन चौक। धमधा नाका रेलवे ओव्हर ब्रिज से ग्रीन चौक की ओर। पुष्पक नगर से कातुल बोर्ड रोड। ग्राम बघेरा से गंजपारा दुर्ग की ओर। बत्तीस बंगला (वाय शेप ब्रिज) से दुर्ग की ओर तथा धनोरा बोरसी की ओर से महाराजा चौक सड़क की ओर सड़क मार्ग में भारी एवं मध्यम मॉल वाहक वाहनों को दोपहर 12 बजे से अपरान्ह 2 बजे तक आवागमन में छूट को निरस्त कर दी गई है। कलेक्टर के आदेशानुसार उक्त समस्त 09 मार्गो पर दोपहर 12 बजे से अपरान्ह 2 बजे तक दी जाने वाली छूट को तत्काल प्रभाव से दिनांक 16 नवम्बर 2026 तक समाप्त (निरस्त) किया गया है। अब इन समस्त मार्गों पर सभी प्रकार के भारी एवं मध्यम मॉल वाहन वाहकों का आवामन प्रातः 06 बजे से रात्रि 11 बजे तक पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। अत्यावश्यक सेवाओं को इस प्रतिबंध से पूर्ववत छूट रहेगी जिसमें आपातकालीन वाहन (एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड आदि)। दवाई, डीजल/पेट्रोल और रसोई गैस सिलेण्डर परिवहन करने वाले वाहन। शासकीय उचित मूल्य दुकानों की खाद्यन्न सामग्री वितरण वाहन। कस्टम मीलिंग (धान/चांवल), दूध, सब्जी, फल और अन्य दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्रियां ले जाने वाले वाहन शािमल है। यह आदेश 6 नवम्बर 2026 से प्रभावशील हो गया है जो दिनांक 16 नवम्बर 2026 के उपरान्त पूर्ववत व्यवस्था लागू होगी। आदेश का उल्लंघन करने पर वैधानिक दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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दुर्ग भिलाई शहरी क्षेत्र अंतर्गत 09 प्रमुख मार्गों में भारी एवं मध्यम वाहनों का दोपहर 12 बजे से अपरान्ह 2 बजे तक आवागमन में छूट निरस्त
दुर्ग, 06 नवम्बर 2026/ कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री अभिजीत सिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के प्रस्ताव से सहमत होते हुए जनहित में सुगम व सुरक्षित यातायात व्यवस्था संचालित करने तथा सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण हेतु मोटर वाहन अधिनियम-1988 तथा छत्तीसगढ़ राज्य शसन द्वार प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पूर्व में जारी आदेश में संशोधन किया है। संशोधित आदेश के अनुसार दुर्ग भिलाई शहरी क्षेत्र अंतर्गत 09 प्रमुख सड़क मार्ग क्रमशः पुलगांव चौक से पोटिया रोड। पुलगांव चौक से गंजपारा की ओर। गुरूद्वारा चौक से बटालियन चौक। धमधा नाका रेलवे ओव्हर ब्रिज से ग्रीन चौक की ओर। पुष्पक नगर से कातुल बोर्ड रोड। ग्राम बघेरा से गंजपारा दुर्ग की ओर। बत्तीस बंगला (वाय शेप ब्रिज) से दुर्ग की ओर तथा धनोरा बोरसी की ओर से महाराजा चौक सड़क की ओर सड़क मार्ग में भारी एवं मध्यम मॉल वाहक वाहनों को दोपहर 12 बजे से अपरान्ह 2 बजे तक आवागमन में छूट को निरस्त कर दी गई है। कलेक्टर के आदेशानुसार उक्त समस्त 09 मार्गो पर दोपहर 12 बजे से अपरान्ह 2 बजे तक दी जाने वाली छूट को तत्काल प्रभाव से दिनांक 16 नवम्बर 2026 तक समाप्त (निरस्त) किया गया है। अब इन समस्त मार्गों पर सभी प्रकार के भारी एवं मध्यम मॉल वाहन वाहकों का आवामन प्रातः 06 बजे से रात्रि 11 बजे तक पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। अत्यावश्यक सेवाओं को इस प्रतिबंध से पूर्ववत छूट रहेगी जिसमें आपातकालीन वाहन (एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड आदि)। दवाई, डीजल/पेट्रोल और रसोई गैस सिलेण्डर परिवहन करने वाले वाहन। शासकीय उचित मूल्य दुकानों की खाद्यन्न सामग्री वितरण वाहन। कस्टम मीलिंग (धान/चांवल), दूध, सब्जी, फल और अन्य दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्रियां ले जाने वाले वाहन शािमल है। यह आदेश 6 नवम्बर 2026 से प्रभावशील हो गया है जो दिनांक 16 नवम्बर 2026 के उपरान्त पूर्ववत व्यवस्था लागू होगी। आदेश का उल्लंघन करने पर वैधानिक दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई में लिबरल आर्ट्स विभाग द्वारा चौथी स्नातकोत्तर शोध संगोष्ठी का आयोजन
दुर्ग, 06 नवम्बर 2026/ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई के लिबरल आर्ट्स विभाग द्वारा दिनांक 2 एवं 3 नवंबर 2026 को चौथी स्नातकोत्तर शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस वर्ष संगोष्ठी का विषय “दैनिक जीवन और उसमें आने वाले व्यवधान: सामान्य जीवन की दिनचर्या एवं बदलाव” था। इस अवसर पर ईसर पुणे की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शालिनी शर्मा ने मुख्य व्याख्यान दिया। उनके व्याख्यान का विषय “दैनिक जीवनरू एक नई सोच, दृष्टिकोण और रचनात्मकता के अवसर के रूप में व्यवधान” था। डॉ. शर्मा ने अपने व्याख्यान में बताया कि दैनिक जीवन की सामान्य दिनचर्या में आने वाले बदलाव और व्यवधान किस प्रकार नई सोच, रचनात्मकता एवं शोध के नए अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे अनुभवों से हम अपने आसपास की चुनौतियों और कठिन परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। इस वर्ष आयोजित स्नातकोत्तर शोध संगोष्ठी में देशभर के शोधार्थियों एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इन शोध पत्रों में मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान के विभिन्न विषयों पर बहुविषयक दृष्टिकोण से चर्चा की गई। प्रस्तुत शोध में दैनिक जीवन की सामान्य दिनचर्या में आने वाले विभिन्न बदलावों एवं व्यवधानों का अध्ययन किया गया तथा यह समझने का प्रयास किया गया कि किस प्रकार ये विषय बौद्धिक चिंतन और शोध के नए अवसर प्रदान करते हैं। शोध पत्रों में समकालीन जीवन के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं, जैसे श्रम, देखभाल, प्रवासन तथा ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ी पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही स्मृतियों पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया। इस शोध संगोष्ठी के अंतर्गत साउथ एशिया रिसर्च के सहयोग से एक शैक्षणिक लेखन कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का संचालन मोंक प्रयोगशाला के रिसर्च ऑथर (शोध लेखक) डॉ. अनिरुद्ध टागट ने किया। उल्लेखनीय है कि उदार कला विभाग द्वारा प्रतिवर्ष स्नातकोत्तर शोध संगोष्ठी का आयोजन किया जाता है। इसका उद्देश्य मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान के शोधार्थियों को अपना शोध कार्य प्रस्तुत करने तथा समसामयिक एवं सामाजिक महत्व के विषयों पर अकादमिक चर्चा और विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करना है। इस संगोष्ठी में विशेष रूप से दक्षिण एशियाई संदर्भों से जुड़े विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई में लिबरल आर्ट्स विभाग द्वारा चौथी स्नातकोत्तर शोध संगोष्ठी का आयोजन
दुर्ग, 06 नवम्बर 2026/ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई के लिबरल आर्ट्स विभाग द्वारा दिनांक 2 एवं 3 नवंबर 2026 को चौथी स्नातकोत्तर शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस वर्ष संगोष्ठी का विषय “दैनिक जीवन और उसमें आने वाले व्यवधान: सामान्य जीवन की दिनचर्या एवं बदलाव” था। इस अवसर पर ईसर पुणे की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शालिनी शर्मा ने मुख्य व्याख्यान दिया। उनके व्याख्यान का विषय “दैनिक जीवनरू एक नई सोच, दृष्टिकोण और रचनात्मकता के अवसर के रूप में व्यवधान” था। डॉ. शर्मा ने अपने व्याख्यान में बताया कि दैनिक जीवन की सामान्य दिनचर्या में आने वाले बदलाव और व्यवधान किस प्रकार नई सोच, रचनात्मकता एवं शोध के नए अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे अनुभवों से हम अपने आसपास की चुनौतियों और कठिन परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। इस वर्ष आयोजित स्नातकोत्तर शोध संगोष्ठी में देशभर के शोधार्थियों एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इन शोध पत्रों में मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान के विभिन्न विषयों पर बहुविषयक दृष्टिकोण से चर्चा की गई। प्रस्तुत शोध में दैनिक जीवन की सामान्य दिनचर्या में आने वाले विभिन्न बदलावों एवं व्यवधानों का अध्ययन किया गया तथा यह समझने का प्रयास किया गया कि किस प्रकार ये विषय बौद्धिक चिंतन और शोध के नए अवसर प्रदान करते हैं। शोध पत्रों में समकालीन जीवन के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं, जैसे श्रम, देखभाल, प्रवासन तथा ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ी पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही स्मृतियों पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया। इस शोध संगोष्ठी के अंतर्गत साउथ एशिया रिसर्च के सहयोग से एक शैक्षणिक लेखन कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का संचालन मोंक प्रयोगशाला के रिसर्च ऑथर (शोध लेखक) डॉ. अनिरुद्ध टागट ने किया। उल्लेखनीय है कि उदार कला विभाग द्वारा प्रतिवर्ष स्नातकोत्तर शोध संगोष्ठी का आयोजन किया जाता है। इसका उद्देश्य मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान के शोधार्थियों को अपना शोध कार्य प्रस्तुत करने तथा समसामयिक एवं सामाजिक महत्व के विषयों पर अकादमिक चर्चा और विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करना है। इस संगोष्ठी में विशेष रूप से दक्षिण एशियाई संदर्भों से जुड़े विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
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साहित्य साधना को मिला मुख्यमंत्री का आत्मीय सम्मान, श्री त्र्यंबक राव ‘अम्बर’ ने पत्र लिखकर जताया आभार
- ‘विष्णु के पाती’ के माध्यम से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने साहित्यिक योगदान की सराहना कर दीं राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं
दुर्ग, 06 नवम्बर 2026/ साहित्य केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं, संस्कृति, विचारों और जीवन मूल्यों को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को दिशा देने के साथ ही प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को भी समृद्ध करते हैं। इसी साहित्यिक साधना और सृजनशीलता को आत्मीय सम्मान देते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर साहित्यकार श्री त्र्यंबक राव ‘अम्बर’ को ‘विष्णु के पाती’ के माध्यम से बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने पत्र के माध्यम से श्री त्र्यंबक राव ‘अम्बर’ के लेखन एवं साहित्यिक योगदान की सराहना करते हुए उनके सृजनात्मक प्रयासों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। मुख्यमंत्री की ओर से प्राप्त यह आत्मीय संदेश श्री अम्बर के लिए केवल शुभकामना पत्र नहीं, बल्कि उनकी साहित्यिक साधना और वर्षों के सृजन के प्रति मिला एक महत्वपूर्ण सम्मान है।
मुख्यमंत्री के इस स्नेहपूर्ण पत्र से अभिभूत श्री त्र्यंबक राव ‘अम्बर’ ने भी पत्र लिखकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस सम्मान को अपने लिए गौरव और प्रेरणा का विषय बताते हुए साहित्य एवं लेखन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और अधिक ऊर्जा मिलने की भावना व्यक्त की।
यह प्रसंग इस बात का सुंदर उदाहरण है कि जब शासन और नेतृत्व समाज के रचनाकारों, साहित्यकारों एवं सृजनधर्मियों के योगदान को पहचानकर उनका सम्मान करते हैं, तो इससे न केवल संबंधित व्यक्ति का उत्साह बढ़ता है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी भाषा, संस्कृति और साहित्य के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा मिलती है।
साहित्यकारों का सम्मान वास्तव में प्रदेश की भाषा, संस्कृति और वैचारिक विरासत का सम्मान है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की यह आत्मीय पहल छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना और सृजनशील परंपरा के प्रति सम्मान की एक संवेदनशील अभिव्यक्ति है
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साहित्य साधना को मिला मुख्यमंत्री का आत्मीय सम्मान, श्री त्र्यंबक राव ‘अम्बर’ ने पत्र लिखकर जताया आभार
- ‘विष्णु के पाती’ के माध्यम से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने साहित्यिक योगदान की सराहना कर दीं राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं
दुर्ग, 06 नवम्बर 2026/ साहित्य केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं, संस्कृति, विचारों और जीवन मूल्यों को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को दिशा देने के साथ ही प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को भी समृद्ध करते हैं। इसी साहित्यिक साधना और सृजनशीलता को आत्मीय सम्मान देते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर साहित्यकार श्री त्र्यंबक राव ‘अम्बर’ को ‘विष्णु के पाती’ के माध्यम से बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने पत्र के माध्यम से श्री त्र्यंबक राव ‘अम्बर’ के लेखन एवं साहित्यिक योगदान की सराहना करते हुए उनके सृजनात्मक प्रयासों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। मुख्यमंत्री की ओर से प्राप्त यह आत्मीय संदेश श्री अम्बर के लिए केवल शुभकामना पत्र नहीं, बल्कि उनकी साहित्यिक साधना और वर्षों के सृजन के प्रति मिला एक महत्वपूर्ण सम्मान है।
मुख्यमंत्री के इस स्नेहपूर्ण पत्र से अभिभूत श्री त्र्यंबक राव ‘अम्बर’ ने भी पत्र लिखकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस सम्मान को अपने लिए गौरव और प्रेरणा का विषय बताते हुए साहित्य एवं लेखन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और अधिक ऊर्जा मिलने की भावना व्यक्त की।
यह प्रसंग इस बात का सुंदर उदाहरण है कि जब शासन और नेतृत्व समाज के रचनाकारों, साहित्यकारों एवं सृजनधर्मियों के योगदान को पहचानकर उनका सम्मान करते हैं, तो इससे न केवल संबंधित व्यक्ति का उत्साह बढ़ता है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी भाषा, संस्कृति और साहित्य के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा मिलती है।
साहित्यकारों का सम्मान वास्तव में प्रदेश की भाषा, संस्कृति और वैचारिक विरासत का सम्मान है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की यह आत्मीय पहल छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना और सृजनशील परंपरा के प्रति सम्मान की एक संवेदनशील अभिव्यक्ति है
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