जिला जनसंपर्क कार्यालय, राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)
समाचार
जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
- कुष्ठ रोगियों के उपचार के नाम पर आवंटित 22.90 एकड़ शासकीय भूमि की लीज निरस्त
- लीज शर्तों का उल्लंघन एवं भूमि का व्यावसायिक उपयोग पाए जाने पर जिला प्रशासन ने की कार्रवाई
- ग्राम नंदई स्थित 22.90 एकड़ भूमि पुन: छत्तीसगढ़ शासन के आधिपत्य में निहित
- तहसीलदार को 7 दिवस के भीतर भूमि का भौतिक कब्जा प्राप्त करने के निर्देश
राजनांदगांव 06 नवम्बर 2026। जिला प्रशासन राजनांदगांव द्वारा शासकीय भूमि के दुरूपयोग एवं लीज शर्तों के गंभीर उल्लंघन के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। ग्राम नंदई तहसील एवं जिला राजनांदगांव स्थित बहुमूल्य 22.90 एकड़ शासकीय भूमि की लीज डीड को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। उक्त भूमि कुष्ठ रोगियों के नि:शुल्क उपचार एवं पुनर्वास के उद्देश्य से संस्था को लीज पर प्रदान की गई थी। जांच में भूमि का निर्धारित उद्देश्य के विपरीत व्यावसायिक उपयोग तथा लीज की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर जिला प्रशासन द्वारा विस्तृत आदेश पारित करते हुए संपूर्ण भूमि पुन: छत्तीसगढ़ शासन के आधिपत्य में निहित कर ली गई है। जिला प्रशासन द्वारा की गई जांच में यह तथ्य सामने आया कि कुष्ठ रोगियों के नि:शुल्क उपचार एवं पुनर्वास के लिए आवंटित भूमि पर मूल लीजधारी संस्था के स्थान पर अन्य संस्था का कब्जा पाया गया। संबंधित संस्था का पंजीयन वर्ष 1993 में हुआ था। जबकि लीज की शर्तों के अनुसार बिना सक्षम अनुमति के भूमि का हस्तांतरण अथवा अन्य संस्था को कब्जा सौंपना प्रतिबंधित था। इसके बावजूद लीज शर्तों का उल्लंघन करते हुए भूमि का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। जांच में यह भी पाया गया कि संस्था द्वारा इलाज के नाम पर अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया गया।
कुष्ठ रोगियों के उपचार के उद्देश्य से आवंटित भूमि का किया जा रहा था व्यावसायिक उपयोग -
जांच में पाया गया कि जिस भूमि को कुष्ठ रोगियों के उपचार एवं कल्याण के लिए आरक्षित किया गया था, वहां निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप गतिविधियां संचालित नहीं की जा रही थी। संस्था की वित्तीय वर्ष 2024-25 की सीए ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वर्षभर में औसतन मात्र 3 मरीज ही इलाजरत पाए गए। वहीं संस्था द्वारा 22.90 एकड़ के विशाल परिसर का उपयोग विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि मरीजों के उपचार के संबंध में संस्था द्वारा संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया। जिला प्रशासन की जांच में यह भी पाया गया कि संस्था द्वारा भूमि पर कब्जा कर अन्य व्यक्तियों को ठेके एवं किराए पर परिसर उपलब्ध कराया गया था। लगभग 43 वर्षों से संबंधित गतिविधियों की जानकारी सक्षम प्राधिकारी को नहीं दी गई थी। जांच में इन तथ्यों को छिपाने तथा लीज की शर्तों की अवहेलना करने का मामला सामने आया।
तालाब, कृषि भूमि एवं भवनों का व्यावसायिक उपयोग -
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि संस्था द्वारा 22.90 एकड़ परिसर के भीतर स्थित लगभग 1.50 एकड़ तालाब को मछली पालन के लिए ठेके पर दिया गया था। इसके अतिरिक्त कृषि भूमि को निजी कृषकों को रेघा पर तथा पक्के भवनों एवं क्वार्टरों को किराए और रेंट एग्रीमेंट के माध्यम से अन्य व्यक्तियों को उपलब्ध कराया गया था। इन गतिविधियों से अनधिकृत रूप से व्यावसायिक आय अर्जित की जा रही थी। जिला प्रशासन ने इसे भूमि आवंटन के मूल उद्देश्य एवं लीज शर्तों का गंभीर उल्लंघन माना है।
स्वास्थ्य विभाग के प्रतिवेदन के आधार पर हुई कार्रवाई -
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया कि शासन द्वारा वर्तमान में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत घर-घर जाकर तथा शासकीय अस्पतालों के माध्यम से कुष्ठ रोगियों को नि:शुल्क दवाइयां एवं बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ऐसी स्थिति में संबंधित संस्था की आवश्यकता परिलक्षित नहीं हो रही थी। जिला प्रशासन द्वारा प्रकरण की विस्तृत जांच एवं उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण के उपरांत छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 के प्रावधानों तथा निहित प्रशासनिक अधिकारों के अंतर्गत कार्रवाई की गई। शासकीय भूमि पर लीज की शर्त क्रमांक 1 एवं 2 का प्रत्यक्ष उल्लंघन, बिना अनुमति संस्था के नाम परिवर्तन एवं कब्जा हस्तांतरण तथा व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन पाए जाने पर भूमि की लीज निरस्त करने का निर्णय लिया गया।
7 दिवस के भीतर शासकीय भूमि का कब्जा प्राप्त करने के निर्देश -
जिला प्रशासन द्वारा तहसीलदार राजनांदगांव को निर्देशित किया गया है कि संबंधित शासकीय अभिलेखों से संस्था का नाम हटाकर छत्तीसगढ़ शासन दर्ज किया जाए। साथ ही 7 दिवस के भीतर संपूर्ण 22.90 एकड़ भूमि का भौतिक कब्जा प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त परिसर में यदि कोई कुष्ठ रोगी वर्तमान में इलाजरत है, तो उसके सुरक्षित स्थानांतरण, भोजन, आवास एवं नि:शुल्क चिकित्सा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दिए गए हैं।
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जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
- कुष्ठ रोगियों के उपचार के नाम पर आवंटित 22.90 एकड़ शासकीय भूमि की लीज निरस्त
- लीज शर्तों का उल्लंघन एवं भूमि का व्यावसायिक उपयोग पाए जाने पर जिला प्रशासन ने की कार्रवाई
- ग्राम नंदई स्थित 22.90 एकड़ भूमि पुन: छत्तीसगढ़ शासन के आधिपत्य में निहित
- तहसीलदार को 7 दिवस के भीतर भूमि का भौतिक कब्जा प्राप्त करने के निर्देश
राजनांदगांव 06 नवम्बर 2026। जिला प्रशासन राजनांदगांव द्वारा शासकीय भूमि के दुरूपयोग एवं लीज शर्तों के गंभीर उल्लंघन के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। ग्राम नंदई तहसील एवं जिला राजनांदगांव स्थित बहुमूल्य 22.90 एकड़ शासकीय भूमि की लीज डीड को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। उक्त भूमि कुष्ठ रोगियों के नि:शुल्क उपचार एवं पुनर्वास के उद्देश्य से संस्था को लीज पर प्रदान की गई थी। जांच में भूमि का निर्धारित उद्देश्य के विपरीत व्यावसायिक उपयोग तथा लीज की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर जिला प्रशासन द्वारा विस्तृत आदेश पारित करते हुए संपूर्ण भूमि पुन: छत्तीसगढ़ शासन के आधिपत्य में निहित कर ली गई है। जिला प्रशासन द्वारा की गई जांच में यह तथ्य सामने आया कि कुष्ठ रोगियों के नि:शुल्क उपचार एवं पुनर्वास के लिए आवंटित भूमि पर मूल लीजधारी संस्था के स्थान पर अन्य संस्था का कब्जा पाया गया। संबंधित संस्था का पंजीयन वर्ष 1993 में हुआ था। जबकि लीज की शर्तों के अनुसार बिना सक्षम अनुमति के भूमि का हस्तांतरण अथवा अन्य संस्था को कब्जा सौंपना प्रतिबंधित था। इसके बावजूद लीज शर्तों का उल्लंघन करते हुए भूमि का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। जांच में यह भी पाया गया कि संस्था द्वारा इलाज के नाम पर अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया गया।
कुष्ठ रोगियों के उपचार के उद्देश्य से आवंटित भूमि का किया जा रहा था व्यावसायिक उपयोग -
जांच में पाया गया कि जिस भूमि को कुष्ठ रोगियों के उपचार एवं कल्याण के लिए आरक्षित किया गया था, वहां निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप गतिविधियां संचालित नहीं की जा रही थी। संस्था की वित्तीय वर्ष 2024-25 की सीए ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वर्षभर में औसतन मात्र 3 मरीज ही इलाजरत पाए गए। वहीं संस्था द्वारा 22.90 एकड़ के विशाल परिसर का उपयोग विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि मरीजों के उपचार के संबंध में संस्था द्वारा संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया। जिला प्रशासन की जांच में यह भी पाया गया कि संस्था द्वारा भूमि पर कब्जा कर अन्य व्यक्तियों को ठेके एवं किराए पर परिसर उपलब्ध कराया गया था। लगभग 43 वर्षों से संबंधित गतिविधियों की जानकारी सक्षम प्राधिकारी को नहीं दी गई थी। जांच में इन तथ्यों को छिपाने तथा लीज की शर्तों की अवहेलना करने का मामला सामने आया।
तालाब, कृषि भूमि एवं भवनों का व्यावसायिक उपयोग -
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि संस्था द्वारा 22.90 एकड़ परिसर के भीतर स्थित लगभग 1.50 एकड़ तालाब को मछली पालन के लिए ठेके पर दिया गया था। इसके अतिरिक्त कृषि भूमि को निजी कृषकों को रेघा पर तथा पक्के भवनों एवं क्वार्टरों को किराए और रेंट एग्रीमेंट के माध्यम से अन्य व्यक्तियों को उपलब्ध कराया गया था। इन गतिविधियों से अनधिकृत रूप से व्यावसायिक आय अर्जित की जा रही थी। जिला प्रशासन ने इसे भूमि आवंटन के मूल उद्देश्य एवं लीज शर्तों का गंभीर उल्लंघन माना है।
स्वास्थ्य विभाग के प्रतिवेदन के आधार पर हुई कार्रवाई -
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया कि शासन द्वारा वर्तमान में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत घर-घर जाकर तथा शासकीय अस्पतालों के माध्यम से कुष्ठ रोगियों को नि:शुल्क दवाइयां एवं बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ऐसी स्थिति में संबंधित संस्था की आवश्यकता परिलक्षित नहीं हो रही थी। जिला प्रशासन द्वारा प्रकरण की विस्तृत जांच एवं उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण के उपरांत छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 के प्रावधानों तथा निहित प्रशासनिक अधिकारों के अंतर्गत कार्रवाई की गई। शासकीय भूमि पर लीज की शर्त क्रमांक 1 एवं 2 का प्रत्यक्ष उल्लंघन, बिना अनुमति संस्था के नाम परिवर्तन एवं कब्जा हस्तांतरण तथा व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन पाए जाने पर भूमि की लीज निरस्त करने का निर्णय लिया गया।
7 दिवस के भीतर शासकीय भूमि का कब्जा प्राप्त करने के निर्देश -
जिला प्रशासन द्वारा तहसीलदार राजनांदगांव को निर्देशित किया गया है कि संबंधित शासकीय अभिलेखों से संस्था का नाम हटाकर छत्तीसगढ़ शासन दर्ज किया जाए। साथ ही 7 दिवस के भीतर संपूर्ण 22.90 एकड़ भूमि का भौतिक कब्जा प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त परिसर में यदि कोई कुष्ठ रोगी वर्तमान में इलाजरत है, तो उसके सुरक्षित स्थानांतरण, भोजन, आवास एवं नि:शुल्क चिकित्सा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दिए गए हैं।
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