PRO Durg news & success stroy & photo _ 21 October 2026 _ File 01

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जिला जनसंपर्क कार्यालय, दुर्ग (छ.ग.)
समाचार

डुंडेरा उप स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक की नियुक्ति की मांग

- तीन माह से बंद सुलभ शौचालय, वार्डवासियों को हो रही परेशानी

- जनदर्शन में प्राप्त हुए 42 आवेदन

दुर्ग, 21 अक्टूबर 2026/
जिला कार्यालय के सभाकक्ष में कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के निर्देशानुसार अनुविभागीय अधिकारी श्री प्रफुल्ल गुप्ता ने जनदर्शन कार्यक्रम में पहुंचे  जनसामान्य लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी। उन्होंने जनदर्शन में पहुंचे सभी लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और समुचित समाधान एवं निराकरण करने संबंधित विभागों को शीघ्र कार्यवाही कर आवश्यक पहल करने को कहा। जनदर्शन में अवैध कब्जा, आवासीय पट्टा, प्रधानमंत्री आवास, भूमि सीमांकन कराने, सीसी रोड निर्माण, ऋण पुस्तिका सुधार, आर्थिक सहायता राशि दिलाने सहित विभिन्न मांगों एवं समस्याओं से संबंधित आज 42 आवेदन प्राप्त हुए।
ग्राम डुंडेरावासी ने विकासखंड निकुम के ग्राम डुंडेरा स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र में सीएचओ अथवा चिकित्सक की नियुक्ति कर नियमित संचालन सुनिश्चित कराने की मांग की। उन्होंने बताया कि ग्रामीण एवं वार्डवासी प्राथमिक उपचार स्वास्थ्य परामर्श तथा आवश्यक दवाईयों के लिए उप स्वास्थ्य केन्द्र पर निर्भर है। वर्तमान में पदस्थ नर्स एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की ड्यूटी विभिन्न शासकीय कार्याे में लगाए जाने के कारण कई बार उप स्वास्थ्य केन्द्र बंद रहता है। इससे मरीजों बुजुर्गाे महिलाओं एवं बच्चों को समय पर उपचार नही मिल पाता है। इस पर एसडीएम ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को उचित कार्यवाही करने को कहा।
वार्ड पार्षद ने सुलभ शौचालय का संधारण कराने आवेदन दिया। वार्ड क्रमांक 33 संतोषी पारा, हुड़को क्वार्टर के पास स्थित सार्वजनिक सुलभ शौचालय का संधारण कार्य तीन माह से बंद होने के कारण वार्डवासियों और आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और राहगीरों को शौचालय की सुविधा नहीं मिल पा रही है। नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा संधारण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, उसके बाद भी अब तक कार्य शुरू नहीं हुआ है। जनहित को ध्यान में रखते हुए शौचालय का कार्य जल्द शुरू कराने तथा साफ-सफाई और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने की मांग की। इसी प्रकार वार्ड क्रमांक 33 संतोषी पारा, कैम्प-2 के विभिन्न स्थानों, विवेकानंद नगर, मजार लाइन, हुडको क्वार्टर सहित 11 स्थानों पर खराब स्ट्रीट लाइटों के संधारण और आवश्यकता अनुसार नई लाइट लगाने की मांग की। इस पर एसडीएम ने संबंधित विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने को कहा।

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जिला जनसंपर्क कार्यालय, दुर्ग (छ.ग.)
समाचार

श्रीमंत झा ने जर्मनी पैरा-आर्मरेसलिंग कप 2026 में जीता एक रजत एक कांस्य पदक, शहीद सैनिकों को समर्पित किया मेडल


दुर्ग, 21 अक्टूबर 2026/ भारत के गौरवशाली पैरा-आर्मरेसलर श्रीमंत झा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर देश का नाम रोशन किया है। जर्मनी में 16 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2026 तक आयोजित  पैरा-आर्मरेसलिंग चौंपियनशिप 2026 में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए एक रजत एक कांस्य पदक जीता है। श्रीमंत ने यह सफलता बेहद कड़े मुकाबले वाली 85 किलोग्राम श्रेणी में हासिल की।
एक रोमांचक और उच्च स्तर के मुकाबले में श्रीमंत झा ने अपनी असाधारण ताकत, सटीक तकनीक और मजबूत इरादों का प्रदर्शन करते हुए जर्मनी के मजबूत खिलाड़ी एरिक होप को शिकस्त दी और पोडियम पर अपनी जगह पक्की की।

शहीद जवानों को समर्पित किया पदक


श्रीमंत झा ने अपनी इस ऐतिहासिक कामयाबी को भारत के वीर शहीदों के नाम किया है। जीत के बाद उन्होंने भावुक होते हुए कहा मेरी हर जीत उन बहादुर सैनिकों के लिए है जिन्होंने हमारे देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। मैं यह रजत पदक हमारे सभी शहीद जवानों को समर्पित करता हूँ।

एक ऐतिहासिक उपलब्धि

इस महाद्वीपीय स्तर की प्रतियोगिता में श्रीमंत झा ने अपने विशाल अनुभव और खेल कौशल का लोहा मनवाया। इस नए पदक के साथ ही पैरा-आर्मरेसलर श्रीमंत झा के नाम अब भारत के लिए कुल 69 अंतरराष्ट्रीय मेडल हो गए हैं। यह सफलता वैश्विक मंच पर उनकी विरासत और पहचान को और मजबूत करती है।

श्रीमंत झा का बयान

यह उपलब्धि मेरे लिए बेहद खास है। मैं हर मैच में हमारे देश के बहादुर जवानों से प्रेरणा लेकर मैदान में उतरता हूँ। मेरा अगला लक्ष्य आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) जीतना और भारत का गौरव बढ़ाना है।
 
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जिला जनसंपर्क कार्यालय, दुर्ग (छ.ग.)
सफलता की कहानी

किराए की छत से अपने आशियाने तक, 40 वर्षों के संघर्ष को मिला सुकून


दुर्ग, 21 अक्‍टूबर 2026 / कुछ सपने उम्र के साथ बूढ़े नहीं होते। वे मन के किसी कोने में उम्मीद बनकर जीवित रहते हैं। अपने घर का सपना भी ऐसा ही सपना है—एक ऐसी छत, जिसे इंसान पूरे अधिकार और आत्मसम्मान के साथ अपना कह सके।  

दुर्ग के आशा नगर, हरिनगर की रहने वाली श्रीमती सीता बाई देवांगन और उनके पति श्री जीवन लाल देवांगन ने इस सपने को अपनी जिंदगी के लगभग चार दशक समर्पित किए। आज जब उनके सिर पर अपनी पक्की छत है, तो यह सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, त्याग, मेहनत और उम्मीद के बाद मिली सुकून की छाँव है।  

35-40 वर्ष पूर्व सीता बाई और उनके पति रोजगार की तलाश में दुर्ग आए थे। सीमित साधनों के साथ उन्होंने एक नए शहर में अपनी जिंदगी शुरू की। आमदनी कम थी, जिम्मेदारियाँ बड़ी थीं और भविष्य अनिश्चित था। वर्षों तक किराए के मकान में रहते हुए परिवार की जरूरतें पूरी करना ही उनकी पहली प्राथमिकता रही।  
श्रीमती सीता बाई फल बेचकर परिवार की आजीविका में योगदान देती रहीं, वहीं श्री जीवन लाल सिलाई का काम करते रहे। मेहनत दोनों की दिनचर्या थी और परिवार उनका सबसे बड़ा संबल।

फिर वह दिन आया, जब वर्षों से आँखों में संजोया सपना हकीकत में बदल गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से श्रीमती सीता बाई देवांगन और उनके परिवार को अपना पक्का घर मिला। घर की चौखट पर कदम रखते समय उनके लिए यह सिर्फ नए मकान में प्रवेश नहीं था, बल्कि उन तमाम वर्षों की थकान के बाद मिली राहत थी, जब उन्होंने किराए की छत के नीचे अपने परिवार का भविष्य संवारा था।  
आज सीता बाई के घर की दीवारों में केवल ईंट, सीमेंट और गारे की मजबूती नहीं है, बल्कि इनमें उनके जीवन की कहानी बसी है।

आज अपनी छत के नीचे बैठकर सीता बाई को वह सुकून मिलता है, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना शायद संभव नहीं।  कभी किराए की छत के नीचे भविष्य की चिंता थी, आज अपनी छत के नीचे भविष्य का भरोसा है।

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